Friday, September 27, 2013

नरेन्द्र मोदी को फाँसने में काँग्रेस देर कर चुकी है.



हालाँकि अब नरेन्द्र मोदी को फाँसने में काँग्रेस देर कर चुकी है... लेकिन उसकी घृणित तरकीबें तो काफी पहले से जारी हैं... इशरत जहाँ के ढेर सारे "सेकुलर अब्बू" भी उसी का परिणाम हैं..

इंडियन एक्सप्रेस का सम्पादक शेखर गुप्ता

आज जनरल वीके सिंह ने कहा की आखिर ये इंडियन एक्सप्रेस का सम्पादक शेखर गुप्ता सेना के बारे में गलत खबरे छापता है तो कांग्रेस सरकार इसके खिलाफ कोई करवाई क्यों नही करती ??

ये शेखर गुप्ता आज मेरी ईमानदारी पर सवाल उठा रहा है .. जबकि कुछ सालो पहले तक भाड़े के फ़्लैट में रहने वाला शेखर गुप्ता आज ५० करोड़ के बंगले का मालिक कैसे बन गया ? दुसरो के पीछे सीबीआई छोडकर जाँच करने वाली केंद्र सरकार कभी शेखर गुप्ता की जाँच क्यों नही करती ?

मित्रो, ये फोटो देखिये ..क्या एक अख़बार का सम्पादक इस तरफ बेतकल्लुफी से सोनिया के साथ बैठकर गपशप कर सकता है ??

Wednesday, September 25, 2013

बंजारा भी आरोपी ... भावेश पटेल भी आरोपी

बंजारा भी आरोपी ... भावेश पटेल भी आरोपी ... दोनों पत्र लिखते है ... एक राज्य सरकार को इस्थिपा लिखता है .. जिसकी कोई भी क़ानूनी अहमियत नही है एक एनआईए की कोर्ट को पत्र लिखता है जिसकी क़ानूनी अहमियत है क्योकि अभी भावेश पटेल के खिलाफ जाँच पूरी नही हुई है और न ही चार्जशीट दायर हुई है ..ऐसे में उनका हर बयान महत्वपूर्ण होता है एक के पत्र पर कांग्रेसी, मीडिया और केंद्र के मंत्री मोदी मोदी ..गुजरात गुजरात कहकर छाती कूटने लगते है ... एक के पत्र पर कहते है की एक आरोपी के पत्र की क्या अहमियत है ?? आखिर ये कांग्रेसी कितने बाप की औलाद होते है ??? 

Sunday, September 8, 2013

देश का कानून नेहरु-गाँधी परिवार के लिए क्यों नहीं है?



देश का कानून नेहरु-गाँधी परिवार के लिए क्यों नहीं है? क्यों उडाता रहता है यह परिवार कानून व्यवस्था की धज्जियां? इसका एक उदाहरण है कांग्रेस के भावी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार राहुल गाँधी! राहुल गाँधी के खिलाफ 8 बार कोर्ट का सम्मन जारी हुआ है परन्तु वह कभी भी कोर्ट में पेश नहीं हुए! अभी हाल ही में 9 वी बार कोर्ट का सम्मन उनके खिलाफ निकला है! क्या वह भारत के कानून और व्यवस्था का सम्मान करते हुए दोबारा कोर्ट में पेश होंगे?

Thursday, August 29, 2013

मुंबईगैंग रेप के सभी आरोपी बांग्लादेशी हैं


मुंबई मे बलात्कार हुआ....सभी बलात्कारी मुस्लिम थे....इतनी तक न्यूज़ मिली हमे.....लेकिन इसके पीछे की न्यूज़ को बड़े ही शातिराना तरीके से हमारी इस सरकार ने दबा दिया

वो ये खबर है की #मुंबईगैंग रेप के सभी आरोपी #बांग्लादेशी हैं जिन्हे मुसलमान होने के चलते कॉंग्रेस सरकार ने भारतीय नागरिकता के सारे पेपर दे कर इन बांग्लादेशियों को भारतीय बना कर हमारे ऊपर अपराधों को झेलने के लिए थोप दिया।

आज देश मे जहां कहीं भी अपराध हो रहे हैं या फिर बलात्कार हो रहे हैं या बम फुट रहे हैं ये सभी बांग्लादेशी मुसलमानों का कार्य है। ये आराम से आसाम और बंगाल के रास्ते वहाँ से भारतीय नागरिक होने के पेपर लेकर बिहार पहुँचते हैं। फिर बिहार से ये पूरे देश मे फैल रहे हैं और अपराध पर अपराध किए जा रहे हैं।लेकिन ये हमारी केंद्र सरकार है जो इन बांग्लादेशी अपराधियों को अपने सिने से चिपकाए उनको भारतीय नागरिकता थोक के भाव मे प्रदान कर रही है।

क्या एक बार भी मुंबई बलात्कार के मामले मे महाराष्ट्र या दिल्ली की केंद्र सरकार ने कहा की ये बलात्कार के आरोपी किस देश या प्रदेश के हैं? नहीं क्यूंकी ये सभी कुकर्मी राक्षस बांग्लादेशी हैं। जिनको वीजा नहीं बल्कि भारतीय नागरिकता दी है केंद्र सरकार ताकि इस केंद्र मे बैठी देशद्रोही कॉंग्रेस सरकार का वोट बैंक बढ़े। इस कॉंग्रेस को हम नागरिकों की सुरक्षा या किसी चीज से कोई सरोकार नहीं है यहाँ तक की देश बेचे जाने और बलात्कारियों एवं आतंकियों को देश मे पालने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता है.....इसको सिर्फ एक चीज चाहिए वोट चाहे जैसे मिले।

ये बात मुंबई मे शिवसेना एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना हमेसा उठाती रही है लेकिन उसको क्षेत्रीय राजनीति का हवाला दे कर और मीडिया के द्वारा बदनाम कर कॉंग्रेस सरकार अपना उल्लू सीधा करती है। जबकि सच्चाई ये है की मुंबई मे रहने वाले बांग्लादेशी मुस्लिमों के पास उत्तर प्रदेश एवं बिहार का परिचय पत्र है और ये सारे परिचय पत्र कॉंग्रेस द्वारा समूहिक रूप से वितरित किए हुए हैं।

इस सच्चाई को अंगीकार कर #एनडीए की पार्टियां तो उठाती हैं परंतु #कॉंग्रेस समर्थित सभी पार्टियां चुप्पी साध लेती हैं यहाँ तक की इस मुद्दे पर नए नवेले नेता #केजरीवाल जी भी चुप्पी साधे बैठे हैं। आखिर #केजरीवाल जी कैसे बोल सकते हैं बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ। केजरीवाल को तो मुस्लिम तुष्टीकरण कर वोट बैंक बनाना है। जो #केजरीवाल कोर्ट द्वारा साबित भगोड़े और खुल्ले मे खुद को पाकिस्तान परस्त कहने वाले #बुखारी के कहने मात्र से वन्देमातरम एवं भारतमाता की तस्वीर को मंच से दूर कर सकता है वो कभी बांग्लादेशी अपराधियों के खिलाफ बोलेगा। लेकिन यही बात एनडीए समर्थित पार्टियां कह दें तो तुरंत दोषारोपण शुरू होगा की एनडीए (भाजपा) मुस्लिम विरोधी पार्टी है।

ये देशद्रोही कोंग्रेसी देश को बेच खाने का पूरा इंतजाम एवं बांग्लादेश से आतंकवादियों को बुला कर देश को धमाके एवं अपराध के परमाणु बम पर बैठाने का पूरा बंदोबस्त कर के बैठे हैं और इसमे #कॉंग्रेस का समर्थन सभी क्षेत्रीय पार्टियां एवं #केजरीवाल भी कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश के कांग्रेसी....इनको मूर्ख कहें या ढक्कन

Wednesday, August 28, 2013

सोनिया गाँधी का ब्लैकबेरी मोबाइल किसी ने चुरा लिया

पता चला है की तबियत खराब होने पर अस्पताल ले जाने की अफरा तफरी में सोनिया गाँधी का ब्लैकबेरी मोबाइल किसी ने चुरा लिया ... एसपीजी और एनएसजी पूरी सिद्दत से उसे खोज रही है और अभी एफआईआर दर्ज नही करवाई गयी है |

अब कुछ सवाल मन में उठाना स्वाभाविक है :=

१- देश के गृहमंत्री संसद में बयान दे चुके है की ब्लैकबेरी देश की सुरक्षा के लिए खतरा है क्योकि इसका सर्वर कनाडा में है और इसके डेटा पर नजर नही रखी जा सकती |

२- दुनिया के सभी कार्पोरेट्स, माफिया, आतंकी, और कालेधन की हेराफेरी करने वाले लोग ब्लैकबेरी यूज करते है क्योकि इसकी मानीटरिंग भारत सरकार नही कर सकती |

३- भारत सरकार के द्वारा बार बार भारत में ही सर्वर लगाने का आदेश दिए जाने पर भी ब्लैकबेरी ने मना कर दिया और कहा की वो भारत छोड़ देगी लेकिन अपने कस्टमर की गोपनीयता पर आंच नही आने देगी

४- सोनिया गाँधी का मोबाइल वही चुरा सकता है जिसकी हैसियत सोनिया गांन्धी के नजदीक जाने की हो उस दिन आठ केन्द्रीय मंत्री, प्रधानमन्त्री, जनार्दन द्विवेदी, राबर्ट बढेरा, प्रियंका, राहुल, मोतीलाल वोरा सोनिया गाँधी के पास गये थे ..तो इसमें से चोर कौन हो सकता है ??

५-सोनिया गाँधी का मोबाईल चुराने के पीछे चोर का मकसद क्या हो सकता है ??

६-खुद एसपीजी कह रही है की वो मोबाइल कीमती नही है लेकिन उसके डाटा बहुत कीमती है ...तो आखिर सोनिया जी के पास कौन सा कीमती डाटा है ??

७-सब जानते है की राजीव गाँधी के मरने के बाद उनके स्विस बैंक में पड़े कालेधन की वारिस सोनिया है तो क्या सोनिया गाँधी इसलिए ऐसी मोबाईल की सेवाए ले रही है जिसका सर्वर विदेश में है जिससे उनके उपर किसी भी एजेंसी को शक नही होने पाए ??

८- जब देश का गृहमंत्री ब्लैकबेरी को खरतनाक बना रहा है तो सोनिया जी खुद ब्लैकबेरी क्यों इस्तेमाल कर रही है ?

९- सोनिया गाँधी का मोबाईल गुपचुप तरीके से क्यों खोजा जा रहा है ?? क्यों नही पुलिस में केस दर्ज करवाया जा रहा है ??

Tuesday, August 20, 2013

65 सालों का एक ऐसा भयानक सच .......जो आपके होश उड़ा देगा

65 सालों का एक ऐसा भयानक सच .......जो आपके होश उड़ा देगा 

ऐसा क्या है कोंग्रेस में कि आजादी 65 सालों तक उसी की सरकारे (चाहे राज्य में हों या केंद्र में ) अधिकाश बनती है ... ( और यह कडवा सच है की आगे भी उसी की बनती रहेंगी ) जबकि जनता त्राहिमान - त्राहिमान भी उसी के शासन में करती हैं ...सबसे ज्यादा दंगे भी उसी के शासन काल में होते रहे है .....यह मैं नहीं सरकारी आंकड़े और इतिहास बताता है ................

.आईये नजर डालते है ......कोंग्रेस की सत्ता से चिपके रहने की गन्दी राजनीती की दास्ताँ की कडवी सच्चाई पर ....

ध्यान से पढ़ें और समझने की कोशिश करें ........

वर्तमान में भारत की जनसँख्या 125 करोड़ के लगभग है ..

औसतन हर राज्य में धर्म के आधार पर जनसँख्या का भाग 15% मुस्लिम , 8% क्रिस्चियन , और 7 % अन्य है यानि हिन्दुओं को छोड़कर 30 % प्रतिशत गैर हिन्दू है , और हिन्दू 70% है .
साधारण शब्दों में हर 100 व्यक्तियों में , 70 हिन्दू , 15 मुसलमान , 8 ईसाई , और 7 अन्य धर्म के लोग हैं ,

अब देखिये चुनाव सूचि यानि की वोटर लिस्ट में 90 % मुसलमान है . 90 % ईसाई है , 90% अन्य दर्ज है ...जबकि हिन्दू मात्र 42 प्रतिशत है

अब एक दिलचस्प पहलू पर नजर डाले -
मुस्लिम ईसाई और अन्य ( हिन्दुओं को छोड़कर ) सबके पार वोटर आई कार्ड होते है .इनके वोटर कार्ड सरकार जल्दी बनवाती है ..फर्जी भी बनवाती है ( बांग्लादेशियों के बारे में रिपोर्ट है की अकेले उत्तरी भारत में साढ़े चार करोड़ अवैध बंगलादेशी मुस्लिमो को कोंग्रेस सरकार में राशन कार्ड और वोटर कार्ड बनवा कर दिए है ) जबकि हिन्दुओं के बारे में पूरी तरह ढिलाई बरती जाती है , अर्थात अनदेखी की जाती है ( अपने ही मुल्क कश्मीर के हिन्दू जब मुस्लिम अत्याचार के मारे अपना घर बार छोड़कर दिल्ली आते है तो उनके वोटर कार्ड नहीं बनाए जाते ...तो पकिस्तान से आये हिन्दुओं की तो आप बात ही छोड़ दें )

यानी अप्रत्यक्ष रूप से हिन्दुओं की संख्या को कम करना और अन्य धर्म के लोगों को प्रोत्साहन देना यह कोंग्रेस की नीति है ...

अब इससे होता क्या है ...
सरकारी दस्तावेजो में प्रत्येक 100 लोगों में वोट देने योग्य ---हिन्दू 42 % , मुसलमान 14 % ,ईसाई 7% अन्य 6% होते है , बाकियों का वोटर कार्ड नहीं होता ..यानि वह वोट नहीं दे सकते ...तो सबसे ज्यादा नुक्सान हिन्दुओं को हुआ ...जो की 28% कम हो गए ,

अब जब वोट देने की बारी जब आती है तो आधे हिन्दू यानि की 21 % ही वोट देने जाते है , जबकि मुसलमान 13% प्रतिशत , ईसाई 6% , अन्य 5 % वोट करते है

अर्थात कुल मिलकर जो वोटिंग का औसतन प्रतिशत होता है वह ...45 % होता है ..कहीं पर इससे कम और कहीं पर इससे ज्यादा होता है ..पर औसत 45% होता है ,

कहने का अर्थ है की यही 45% लोग भारतीय राजनीती की दिशा तय करते है ..इसमें हिन्दू 21% है जबकि मुसलमान और ईसाई 24 % हैं

.यानि की भारत में कोंग्रेस की नीति और सत्ता का यही गणित काम करता है ..और 65 सालों से हर जगह कारगार सिद्ध होता रहा है .

आईये अब देखते है की कुल जनसँख्या के 45 % वोट किस प्रकार किसे मिलते है

13 % प्रतिशत में से 10 % मुसलमान कोंग्रेस को वोट देते है
6% में से 5% ईसाई कोंग्रेस को वोट देते है ,
अन्य 5% में से 3% भी कोंग्रेस को वोट देते है

इसका अर्थ है की 45 % कुल वोटों में से 18% गैर हिन्दू वोट कोंग्रेस को मिलते है और BJP को 1% मुस्लिम और 1% अन्यों के कुल 2% वोट मिलते है

यानि की कुल 24% प्रतिशत गैर हिन्दू वोटों में से BJP को केवल 2% वोट मिलते है और कोंग्रेस को 18% मिलते है बाकि के 4% अन्य पार्टियों ( थर्ड फ्रंट)में बाँट जाते है

अब सबसे महत्वपूर्ण ध्यान देने योग्य तथ्य

अब आते है हिन्दुओं के 21% वोटों पर ---
हिन्दू 21% में से केवल 5% कोंग्रेस को , 10% बीजेपी को , और 6% अन्य को वोट देते है

अब परिणाम क्या होता है
किसके खाते में कुल कितने वोट आते है

कोंग्रेस के कुल मिलाकर 23% वोट होते है
बीजेपी के कुल मिलाकर 12% वोट वोट होते है
अन्य पार्टियां के कुल मिलाकर 9% वोट वोट होते है

यही कारण है कोंग्रेस को हिन्दू वोटों की चिंता नहीं होती , क्योंकि हिन्दू बहुत कम कोंग्रेस को वोट देते है ,,,,जबकि मुस्लिम और ईसाई सबसे ज्यादा वोट देते है ...यही इसके वोट बैंक है ,,,वह इन्ही की भलाई के लिए नीतियाँ बनती है ......

और एक कडवी सच्चाई यह भी है की जब जब मुस्लिम कोंग्रेस को वोट नहीं करते ...तब तब कोंग्रेस हारती है ...कोंग्रेस को हिन्दू वोटो से इतना असर नहीं पड़ता जितना की मुस्लिम औए ईसाई वोटों से पड़ता है ....इसीलिए कोंग्रेस दंगे करवाकर मुसलमानों को बहुसंख्यक हिन्दुओं का भय दिखाकर हमेशा से ही वोट हासिल करने की नीति पर चलती है ......दंगे होंगे तो मुस्लिम इकठा होगा ...इकठा होगा तो कोंग्रेस हिन्दुओं का हौवा खड़ा करेगी ,.....और मुस्लिम धर्मगुरु फतवा देंगे की काफिरों से लड़ने के लिए कोंग्रेस को वोट दो ......और कोंग्रेस को हर बार मुस्लिम वोट मिल जाते है .................और कोंग्रेस का यह फार्मूला हर बार 90% तक कामयाब होता रहा है ...और भविष्य में भी होता रहेगा ......

मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण मुस्लिम जनसँख्या बढ़ रही है . जवाहर लाल नेहरु के " हिन्दू कोड बिल : के कारण सन 1952 से ही कोंग्रेस हिन्दुओं की जनसँख्या कम और मुस्लिमों की जनसँख्या बढाने का प्रयास करती रही है ...और जब जब वह सत्ता में रही है यही नीतियाँ आगे बढ़ी है .....हिन्दू घटा है ...मुस्लिम और ईसाई बढ़ा है ......

अभी तक वह 15% मुसलमानों और 8% ईसाईयों के दम पर ही 70% हिन्दुओं को किनारे लगा कर बैठी है ..और कोई चिंता नहीं करती तो कल्पना कीजिये अगर मुसलमान औए ईसाई की जनसँख्या कुल मिलाकर 50% हो गयी ...तो ????

उस दिन मुग्लिस्तान का निर्माण हो जाएगा ...और हिन्दू की हालत कश्मीर के हिन्दुओं की तरह हो जायेगी
और कोंग्रेस अगर अगले 20 साल सत्ता के केंद्र में रही तो हमें यह दिन अपने इसी जन्म में देखने को मिल जाएगा ,,,

अब हम ऐसा क्या करें की कोंग्रेस की इस नीति को तोडा जाए ..ताकि हमारा अस्तित्व बचा रहे ...

1 . सबसे पहले हम सभी हिन्दुओं को अपने वोटर आई कार्ड बनवाने होंगे ,
जिससे हमारा वोटिंग प्रतिशत जो की अभी 42% है उसे 70% तक लाया जा सके .

2 . जल्दी से जल्दी अपना वोटर कार बनवाये और दुसरे हिन्दू भाईयों को बनवाने में मदद करें ,

3 . जिस दिन चुनाव हो उस दिन कोई और काम बाद में करें पहले वोटिंग बूथ पर जाकर वोट जरूर करें

4 . वोट हमेशा राष्ट्रीय देशभक्त जैसे नेता को दें , जैसा की नरेंदर मोदी जी हैं

मित्रो कोंग्रेस कभी भी नहीं चाहती की कोई ऐसा क़ानून बने जिससे सभी मतदाताओं का मत देना यानि चुनाव में भाग लेना जरूरी हो ..अर्थात( " मतदाता अनिवार्य क़ानून ) बने
क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो कोंग्रेस के मुस्लिम औए ईसाई वोटो के आगे हिन्दू वोट ज्यादा हो जायेंगे और वह सत्ता में नहीं आएगी ...

मित्रों ..हमारी माँ भारती ...आज सनातन धर्म के रसातल में पंहुच जाने पर बहुत पीड़ित है ...उसे आप सभी की जरूरत है ...यह आज आपसे खून नहीं मांग रही है ...न ही कोई पैसा मांग रही है ....यह आपसे बस इतनी अपील कर रही है की आप चुनाव के समय अपना कीमती वोट अवश्य दे ........
अगर ऐसा नहीं हुआ तो एक दिन ( बहुत जल्दी ही ) मुस्लिम जेहाद की आग आपको और हमारे बच्चों को निंगल जायेगी ...........

( अगर इसे पढ़कर आपके दिल में संवेदना जगी हो तो इसे अपने मित्रों को अपने नाम से शेयर जरूर करें )

निवेदक आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहा है की मेरी माँ भारती को बचा लो ....

असली वाला भारत निर्माण

अनर्थशास्त्री बन गये प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह आजकल तो इनका भाषण ही मार्केट गिरा देता है और डॉलर के मुकाबले रूपये को भी कमज़ोर कर देता है वाह

ये है असली वाला भारत निर्माण

क्या हालत की है देश की इन ६० वर्षीय काले काँग्रेसी शासन ने - बस और नहीं अब और नही .......!! 1925 में डॉलर सिर्फ 10 पैसे का था। 8 जुलाई 2013 को एक डॉलर 60.61 रुपए का दर्ज किया गया। ऐसा क्या हुआ कि पिछले 66 साल में हमारे रुपए में 6,000 फीसदी गिरावट आ चुकी है? जैसे-जैसे इन काले अंग्रेजो ने भारत को स्वार्थ सिद्धि करके -भ्रष्टाचार करके -विदेशीकरण करके भारत को विदेशी निर्भरता पर ला खड़ा किया वो दिन दूर नहीं जब ये आम आदमी को मंहगाई से ही मार डालेंगे -और नाम संघ और मोदी का लगायेंगे - हद है ऐसे लोगो की गिरवी/गुलामी सोच की ...मोदी न आये -भले ही लोग म़ेहगाई से लोग मर जाएँ - ये है इनकी मानसिक बीमारी या यूँ कहें मोदी जी की लोकप्रिय विकास-परक कार्यशैली का भय अथवा खुद की असफलता की कुंठा !!


जवाब है बढ़ता भुगतान असंतुलन,अव्यवस्थित प्रबंधन,चालू खाते का घाटा और मुद्रास्फीति का दबाव। 1947 में जब हम आजाद हुए, डॉलर एक रुपए का था। अर्थव्यवस्था सीमित थी। जरूरतें कम थीं। विदेशों पर निर्भरता न के बराबर थी और
जैसे-जैसे आयात बढ़ा, रुपए की तुलना में डॉलर मजबूत होता गया. जैसे-जैसे देश का विकास हुआ हम अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर होते गए। आयात बढ़ा तो भुगतान में भी इजाफा हुआ, जो डॉलर में था। 1975 के बाद ऊर्जा की जरूरतें बढ़ीं। 1980 तक देश सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता बन गया। आयात-निर्यात में अंतर बढऩे लगा। डॉलर की मांग बढ़ती गई और मजबूती भी।

1947 में एक डॉलर एक रुपए का था
1990 में उदारीकरण के बाद डॉलर ढाई गुना तक बढ़ा
1947 अर्थव्यवस्था का आकार छोटा था। जरूरतें ज्यादा नहीं थीं। विदेश पर निर्भरता भी न के बराबर थी।
1952 औद्योगिकी और तकनीकी जरूरतों के लिए विदेश पर निर्भरता बढऩे लगी।
1990 अर्थव्यवस्था में खुलेपन की शुरुआत हुई। अंतरराष्ट्रीय कारोबार बढ़ने लगा।
2000 आयात बढ़ा। रुपए के मुकाबले डॉलर में ढाई गुना की जबर्दस्त वृद्धि हुई।
2012 हम ऊर्जा, रक्षा आदि क्षेत्रों में विदेश पर निर्भर हैं। यानी भारी आयात। डॉलर में बड़ा पेमेंट।
2012 हम ऊर्जा, रक्षा आदि क्षेत्रों में विदेश पर निर्भर हैं। यानी भारी आयात। डॉलर में बड़ा पेमेंट !! 

जेल मे बंद .मुस्लिम को क़ानूनी सहयता देगी कांग्रेस

जादा से जादा शेयर करे नीच कांग्रेस की हकीकत 

भारत को पाकिस्तान बनाने और अग्रसर कांग्रेस ....मुस्लिम प्रेम में बुरी तरह पागल हो चुकी है ये सरकार इस सरकार को भी मुल्ला सरकार की तरह मुस्लिम जो जेल मे बंद है निर्दोष है अब क़ानूनी सहयता देगी कांग्रेस 
http://aajtak.intoday.in/story/home-ministry-to-provide-legal-assistance-to-jailed-muslim-youth--1-739520.html

Friday, August 9, 2013

पीएम खुद आतंकवादियों से घिरे हुए हैं



कौन से आतंकवादी की निंदा करें पीएम वो खुद आतंकवादियों से घिरे हुए हैं

और उनके आजू बाजू ही आई एस आई के एजेंट और पाकिस्तान परस्त लोग रहते हैं

Sunday, August 4, 2013

साल १९९९ - रायबरेली में प्रियंका गाँधी


साल १९९९ का लोकसभा चुनाव ... रायबरेली मतविस्तार से बीजेपी के तरफ के राजीव गाँधी के चचेरे भाई और उनके सरकार में ताकतवर गृहमंत्री रहे अरुण नेहरु उम्मीदवार थे तो कांग्रेस के तरफ से राजीव गाँधी के साथ इंडियन एयरलाइन्स में पाइलट रहे कैप्टन सतीश शर्मा थे |

सारे सर्वे में अरुण नेहरु की जीत पक्की मानी जा रही थी .. क्योकि अरुण नेहरु सालो से अपनी कर्मभूमि रायबरेली को बनाये थे .. सतीश शर्मा ने खुद ही अपनी हार तय मान ली थी ..

लेकिन तभी रायबरेली में प्रियंका गाँधी की धमाकेदार एंट्री होती है ... दिल्ली में कैप्री, जींस, कट्टी टॉप पहनने वाली प्रियंका रायबरेली में खादी की बार्डर वाली साड़ी और आँखों में ग्लिसरीन लगाकर पहुची .

फिर हर जगह मंच पर जाकर एक ही बात कहती और वो भी आँखों में ग्लिसरीन लगाकर नकली आंसूओं के साथ "क्या आप उस व्यक्ति को वोट देंगे जिसने मेरे पिता के मंत्रिमंडल से इश्थिपा देकर उन्हें हराया .. उनकी कुर्सी गयी जिससे उनकी हत्या हुई और मै अनाथ हो गयी ... फिर वो साड़ी के कोने से अपना आँख पोछने लगती"

भारत की मुर्ख जनता को और क्या चाहिए ??? जनता सारे घोटाले गरीबी, भ्रष्टाचार, आदि प्रियंका की आंसूओं के सामने भूल गयी ..

फिर तो पूरी बाजी पलट गयी और कांग्रेस में सतीश शर्मा बम्पर वोटो से जीत गये ||

कांग्रेस या सपा ?

कौन ज्यादा नीच और खतरनाक है ?? कांग्रेस या सपा ? सपा तो सिर्फ एक प्रदेश में सिमटी हुई है लेकिन कांग्रेस का कैंसर पुरे देश में फैला हुआ है ..

अब देखिये .. सपा ने एक खनिज माफिया के कहने पर दुर्गा का तबादला किया तो कांग्रेस ने एक अंतर्राष्ट्रीय स्मगलर, कुख्यात अपराधी गाजी फकीर जिसे पाकिस्तान और भारत के बार्डर के सिन्धी मुसलमान अपना धर्मगुरु मानते है उसके कहने पर पंकज का तबादला किया ....

गाजी फकीर सिर्फ नाम का फकीर है इनके एक बार एक लडकी से बलात्कार की कोशिश की थी .. पाकिस्तान की आईएसआई में इसके कई लोग है और ये आईएसआई का एजेंट है ..

सत्तर और अस्सी के दशक में जब अमेरिकी सरकार अमेरिकी युवाओ में ड्रग्स के बढ़ते लत से परेशान हो गयी तब उसने पुरे विश्व के ड्रग्स माफियाओ की छानबीन करनी शुरू की ... तब अमेरिकी एजेंसी एफबीआई ने विश्व के आठ कुख्यात ड्रग्स डीलरो की लिस्ट बनाई थी जिसमे कोलम्बिया का पाब्लो एस्केबार, पनामा का जनरल नोरियेगा, अफगानिस्तान का हाजी मुस्तफा और भारत का गाजी फकीर का नाम था |

तो मित्रो सोचिये ..कौन ज्यादा नीच है ?? कांग्रेस या सपा ??

और हाँ .. सोनिया जी इस मामले पर भी चिठ्टी लिखने वाली थी लेकिन तभी उनके पेन का रिफिल खत्म हो गया और अहमद पटेल सोनिया जी के लिए रिफिल लेने गये है लेकिन अभी तक लौटे नही है ... जब वो आ जायेंगे तब सोनिया जी इस मुद्दे पर भी चिठ्ठी लिखेंगी नही तो देशवासी उनको दोगला समझने लगेंगे

Friday, July 26, 2013

"टंच माल" ये क्या होता है ?

"टंच माल" ये क्या होता है ?
दिग्गी बाबु मीनाक्षी नटराजन (कांग्रेस की नेत्री) को "टंच माल" कहते है अपने बयान में

अनुज विश्वकर्मा's photo.



--वैसे भी कांग्रेस का अंदरूनी मामला है , मालबाजीचलती होगी , गांधीवादी होंगी मीनाक्षी जी अतः सबकेपास मिलती-जुलती होंगी
Parul के कुछ प्रश्न हैदिग्गी बाबु से ----
1 . की सोनिया जी कैसा माल है ?
2 .वर्तमान में जैसी भी है..आज से 20 साल पहले कैसा मालथी ?
3 . किन-किन जौहरियों ने इस माल की जांच पड़ताल की है ??
4 . कांग्रेस माल-दार (पैसे से भी) पार्टी है ?
5 . माल का उपयोग कहा-कहा होता है ,क्या दूसरी पार्टीके जौहरी भी इसकी जांच करतेहै ?
6 . क्या राहुल बाबा टंच मालहै ?? या स्वयं जौहरी है ?

Thursday, July 25, 2013

गुजरात के दंगे भी कांग्रेस ने कराये थे

कांग्रेस नेता शकील अहमद ने कहा की इंडियन मुजाहिद्दीन का निर्माण गुजरात दंगो के के कारन ही हुआ था तो इसके जवाब में बीजेपी की प्रवक्ता मीनक्षी लेखी ने कई चौका देने वाली जानकारी दी।

उन्होंने बताया की आज गुजरात में 2002 के बाद एक भी दंगा नहीं हुआ और गुजरात के दंगे भी कांग्रेस ने कराये थे। अगर आप देखेंगे तो जिन लोगो ने गोधरा में ट्रेन में हिन्दुओ को जिन्दा जलाया उनमे से हाफिज पानवाला कांग्रेस पार्टी से है। ज़किया जाफरी का घर जलाने वाला कांग्रेस पार्टी का कॉर्पोरटर था जिसका नाम नील सिंह चौधरी है। निसार बापू जो कांग्रेस का मेयर था वो वडोधरा के दंगो में शामिल था। मुहम्मद सुर्ती जो सूरत से कांग्रेस का मंत्री था वो भी बम ब्लास्ट करने में शामिल था। उन्होंने यह भी बताया की अभी तक गुजरात दंगो में न्यायलय ने 25 कांग्रेस के नेताओ को सजा दे चुकी है। यह सिद्ध हो चूका है की गुजरात दंगे कांग्रेस ने कराये थे फिर भी कांग्रेस मोदी पर झूटे आरोप लगते रहती है।

उन्होंने यह भी बताया की कांग्रेस कहती है की गुजरात के दंगो में कुल 1169 लोग मारे गए जिसमे 30% लोग हिन्दू थे लेकिन कांग्रेस और बिकाऊ मीडिया यह बात लोगो को कभी नहीं बताती है।

उन्होंने बताया की कश्मीर से कन्याकुमारी, केरेला तक हिन्दू असुरक्छित है। कश्मीर से 5 लाख हिन्दुओ को बहार फेका गया, अभी तमिलनाडु में बीजेपी के एक हिन्दू नेता को मारा गया, अगर आप तमाम घटनाये जोरेंगे तो केवल पिछले एक वर्ष में ही १६ ऐसी घटनाये हुई है जहा केरेला और तमिलनाडु में हिन्दु नेताओ को मारा गया है। अगर आप उससे भी पुराना इतिहास देखेंगे तो आप देखेंगे की किस प्रकार से हिन्दुओ को मारा गया है। कांग्रेस के शाशन में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई कोई भी सुरक्छित नहीं है।

http://www.youtube.com/watch?v=AsexbzB__cE


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आप चाहे किसी भी मज़हब या राजनैतिक दल से ताल्लुक रखते हो राष्ट्रहित के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़िए... और शेयर कीजिये...

● 1- भारत की आज़ादी के बाद के इतिहास में सबसे भयानक दंगे 1969 में अहमदाबाद (गुजरात) में हुए थे जिसमें 5000 मुसलमान मारे गए थे। उस वक़्त गुजरात के मुख्यमंत्री काँग्रेस के "हितेन्द्र भाई देसाई" थे और भारत की प्रधानमंत्री इन्दिरा जी ..........
● 2- इसके बाद दूसरा बड़ा दंगा 1985 में गुजरात में हुआ जिसके बाद अन्य छोटे छोटे दंगे हुए जो महीनो तक चले, तब गुजरात के मुख्यमंत्री काँग्रेस के 'माधवजी सोलंकी' थे और भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। .......
● 3-1987 में गुजरात में फिर दंगे हुए और तब भी गुजरात के मुख्यमंत्री काँग्रेस के 'अमर सिंह चौधरी' थे।
● 4- इसके बाद 1990 में फिर से गुजरात दंगो की आग में दहक उठा। उस समय भी गुजरात के मुख्यमंत्री काँग्रेस के 'चिमन भाई पटेल' थे।
● 5. और आखिर में 1992 में हुए दंगो के समय भी गुजरात के मुख्यमंत्री काँग्रेस के 'छिमा भाई पटेल' ही थे।
● गुजरात के इतिहास के सैकड़ो दंगो में से इन 5 बड़े दंगो के लिए हमारे "बुद्धिजीवी और मुस्लिम किसे जिम्मेदार मानेंगे ?? और याद रखिए गुजरात में 2002 के बाद से अमन और शांति कायम है... तो क्या आजतक मुस्लिमो की प्रिय कांग्रेस ने उन दंगो में मारे गए मुसलमानों के लिए कभी अपने मुंह से एक शब्द भी निकाला ? क्यो कांग्रेस केवल २००२ दंगो के लिए रोती रहती है ? कांग्रेस के राज में उन दंगो में मारे गए मुसलमानो का खून- खून ना हो कर पानी था क्या ? पर कांग्रेस क्यो बेकार में इस मुसीबत का साँप अपने गले में लटकाए जब खुद मुसलमानो को ही उन दंगो या उन दंगो में मारे गए मुसलमानो की याद नहीं है, उनको तो बस २००२ के दंगे याद हैं, वो भी तब- जबकि वो एक क्रिया के प्रतिक्रिया स्वरूप हुए थे, मुसलमानों मित्रो मैं नहीं कहता कि आप मोदी पर विश्वास करो पर आप जिस नीच कांग्रेस पार्टी को 65 सालो से अपना रहनुमा समझते आ रहे हो, उससे एक बार इस चीज़ का जवाब जरुर मांगो, कि यदि २००२ के मोदी के शासन में हुए दंगो के लिए कथित रूप से मोदी जिम्मेदार है, फिर उससे पहले कांग्रेस के शासनकाल में जो दंगे हुए थे, उनके लिए कौन जिम्मेदार है और उनके दोषिओं में से आजतक कितनो को सजा हुई ?



कांग्रेश की सबसे बड़ी मुसीबत ये है की समजोता एक्षप्रेस , माले गाव ब्लास्ट में हिन्दुओ को फ़साने के बाद साबुत बिलकुल नहीं मिल रहे है , कहते है मेजर पुरोहित ने ब्लास्ट किया और आर. दी. एक्ष .सेना से लाये !! सेना का कहना है की आर . डी . एक्ष . भारतीय सेना में नहीं होता है .

हेडली की पत्नी ने लिखित बयान दिया है की समजोता ब्लास्ट मामले में और मालेगांव मामले में उसके पति का हाथ है , अब भारत सरकार इस केस को ना उगल सकती है ना निगल सकती ----------- आई.बी. प्रमुख

Wednesday, July 24, 2013

American agent मनमोहन सिंह

भारत की कोई कंपनी 1 करोड़ रुपए लेकर नेपाल जाती हैं !

वहाँ एक फैक्ट्री लागती हैं !

नेपाल के 100 लोग उसमे काम करते हैं !!
एक साल बाद हमारी कंपनी नेपाल मे 11 करोड़ रूपये कमाती है !!

और मान लो 11 करोड़ मे से वो 1 करोड़ रूपये के वेतन काम करने वालों को बाँट देती है !

और मान लो 1 करोड़ रूपये का ही नेपाल की सरकार tax दे देती है !

और बाकी बचे 9 करोड़ रूपये net profit भारत ले आती है !! तो फाइदा नेपाल को हो रहा है या भारत को ??????
एक अनपढ़ आदमी भी समझ जाएगा कि फायदा सिर्फ भारत को हो रहा है ! नेपाल का पैसा भारत जा रहा है!

लेकिन American agent मनमोहन सिंह कहता है walmart के आने से भारत को फायदा होगा !





कांग्रेसियो के पिताजी क्वात्रोची के इतिहास पर एक नजर

कांग्रेसियो के पिताजी क्वात्रोची के इतिहास पर एक नजर :-



--16 अप्रैल 1987: स्वीडिश रेडियो ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया। घोटाले में मार्टिन आर्दबो, हिंदुजा ब्रदर्स और विन चड्ढा भी आरोपी हैं।

--22 अक्तूबर, 1999: सीबीआई ने क्वात्रोच्चि के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।

--4 नवंबर, 1999: ट्रायल कोर्ट ने क्वात्रोच्चि के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया।

--20 दिसंबर, 2000: मलयेशिया में क्वात्रोच्चि गिरफ्तार। मलयेशिया की अदालत ने क्वात्रोच्चि को भारत को प्रत्यर्पित करने से इंकार किया, बाद में वहां से रिहा कर दिया गया।

--25 मई, 2001: स्पेशल जज ने क्वात्रोच्चि का मुकदमा बाकी आरोपियों से अलग किया।

--25 मई, 2003: लंदन में क्वात्रोच्चि के दो खातों में 10 लाख यूएस डॉलर और 30 लाख यूरो मिले।

--31 मार्च, 2004: मलयेशिया की अदालत ने क्वात्रोच्चि के प्रत्यर्पण का अनुरोध ठुकराया।

--25 अगस्त, 2005: सीबीआई ने अपनी वेबसाइट पर क्वात्रोच्चि की तस्वीर जारी की।

--22 दिसंबर, 2005: एडिशनल सॉलिसिटर जनरल क्वात्रोच्चि के खाते सील करने पर वार्ता के लिए लंदन में अफसरों से मिले।

--11 जनवरी, 2006: सीबीआई ने ब्रिटिश अधिकारियों से कहा उसके पास कोई प्रमाण नहीं है, जिसके आधार पर ओतावियो क्वात्रोच्चि के दो बैंक खातों में जमा तीस लाख यूरो और 10 लाख अमेरिकी डॉलर की रकम का संबंध बोफोर्स तोप सौदे की दलाली से साबित करे।

--12 जनवरी, 2006: क्वात्रोच्चि के खातों को क्लीन चिट देने के सरकार के कदम के खिलाफ अधिवक्ता अजय अग्रवाल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई।

--13 जनवरी, 2006: केंद्र सरकार के कदम को चुनौती देने वाली अजय अग्रवाल की याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार। कोर्ट ने इस संबंध में सभी जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने का निर्देश दिया।

--15 जनवरी, 2006: क्वात्रोच्चि के दोनों खातों पर लगी रोक लंदन हाई कोर्ट ने हटाई। (भारत के सॉलिसिटर जनरल द्वारा ब्रिटेन के क्राउन प्रॉसीक्यूशन को क्वात्रोच्चि के खिलाफ सुबूत नहीं मिलने की जानकारी के बाद यह रोक हटाई।)

गौरतलब है की क्वात्रोची के बैंक खातो पर लगी रोक हटाने के लिए क्वात्रोची ने कोई मेहनत नही किया बल्कि भारत सरकार ने खुद अपने तत्कालीन कानून मंत्री हंसराज भरद्वाज को लन्दन भेज कर ब्रिटिश कोर्ट को बताया की क्वात्रोची एक संत महात्मा है उन्होंने कोई अपराध नही किया है इसलिए भारत सरकार दरखास्त करती है की माननीय क्वात्रोची जी के बैंक खातो पर लगी रोक हटाई जाये |

ये पूरी प्रक्रिया एकदम गुप्त रखी गयी थी ... जैसे ही क्वात्रोची के खातो से रोक हटी उसने एक मिनट के भीतर अपने तीनो बैंक खातो से बीस करोड़ डालर अपने बेटे के खाते में ट्रांसफर कर दिए ... जब भारत की सुप्रीमकोर्ट को पता चला तब उसने भारत सरकार को नोटिस दिया तब भारत सरकार ने कहा की उसके खातो में एक पाई भी नही है ..

बाद में लन्दन के अख़बार मिरर ने खुलासा किया की भारत सरकार के कानूनमंत्री खुद २० दिनों तक लन्दन में रुक क्र क्वात्रोची के खातो से रोक हटवाई थी


--16 जनवरी, 2006: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी कर क्वात्रोच्चि के खाते से लेन-देन नहीं होने के लिए जरूर कदम उठाने का निर्देश दिया।
सीबीआई मुझसे इटली में पूछताछ करे, गांधी परिवार के खिलाफ अभियान का शिकार हूं: क्वात्रोच्चि (फोन पर एक संवाद एजेंसी से कहा।)

--20 जनवरी, 2006: सरकार द्वारा क्वात्रोच्चि को क्लीन चिट दिये जाने के मामले में एनडीए प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से मिला और एक ज्ञापन सौंपा।

--23 जनवरी, 2006: क्वात्रोच्चि के खातों के तार स्विट्जरलैंड से जुड़े या नहीं इसकी जांच के लिए सीबीआई ने वहां जाने के लिए गृहमंत्रालय से अनुमति देने की गुजारिश की।

--6 फरवरी, 2007: क्वात्रोच्चि को अर्जेंटीना के इगुआजो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया।

--23 फरवरी, 2007: क्वात्रोच्चि को अर्जेंटीना सरकार ने जमानत दी।

--26 फरवरी, 2007: सीबीआई को जब तक गिरफ्तारी की खबर मिली, अर्जेंटीना सरकार उसे रिहा भी कर चुकी थी।

--8 मार्च, 2007: सीबीआई ने क्वात्रोच्चि मामले में सुप्रीम कोर्ट में सफाई पेश करते हुए कहा कि उस पर लगाए गए आरोप निराधार है और उसने कोर्ट से कोई सूचना नहीं छुपाई थी।
सीबीआई ने कहा कि क्वात्रोच्चि की 23 फरवरी को हुई जमानत के बारे में उसे पहले से कोई जानकारी नहीं थी। ब्यूरो को इस बात की जानकारी 26 फरवरी को मिली थी।

--23 मार्च, 2007: अर्जेंटीना के कोर्ट में क्वात्रोच्चि ने अपने भारत प्रत्यर्पण का पुरजोर विरोध किया।

--13 अप्रैल, 2007: क्वात्रोच्चि के प्रत्यर्पण के मामले में सीबीआई ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट में सीबीआई ने क्वात्रोच्चि की सही पहचान का दावा किया।

--8 जून, 2007: अदालत ने क्वात्रोच्चि की अर्जेंटीना में गिरफ्तारी से संबंधित मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा।

--9 जून, 2007: अर्जेंटीना की एक अदालत ने क्वात्रोच्चि को भारत प्रत्यर्पित करने के आग्रह को अस्वीकार कर दिया। सीबीआई की क्वात्रोच्चि का भारत लाने की मुहिम को बड़ा झटका लगा।

--12 जून, 2007: क्वात्रोच्चि मामले में सीबीआई को एक और झटका लगा जब अर्जेंटीना की अदालत ने अभियोजन पक्ष को ओतावियो क्वात्राकी को मुकदमे का खर्च अदा करने का आदेश दिया।

--15 अगस्त, 2007: 6 फरवरी को अर्जेंटीना में गिरफ्तार क्वात्रोच्चि इटली रवाना, सीबीआई फिर प्रत्यर्पण कराने में विफल रही।

--18 अगस्त, 2007: क्वात्रोच्चि के प्रत्यर्पण के लिए किए गए सरकार और सीबीआई के प्रयासों से संबंधित सारे दस्तावेज पेश कराने हेतु वकील अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दायर किया।

--3 नवंबर, 2007: अधिवक्ता अजय अग्रवाल द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने कोर्ट में कहा कि जब भी कोर्ट क्वात्राकी के बारे में आदेश देता है, हमें विदेशी अदालतों में मुंह की खानी पड़ती है। ऐसी स्थिति में बेहतर होगा कि कोर्ट कोई आदेश न दे क्योंकि उनका पालन करवाना असंभव है।

--28 अप्रैल, 2009: क्वात्रोच्चि का नाम वांछित लोगों की सीबीआई की सूची से हटाया गया। इसके साथ ही सीबीआई के अनुरोध के बाद इंटरपोल ने क्वात्रोच्चि का नाम रेड कॉर्नर नोटिस से हटा दिया।

--26 अगस्त, 2010: सीबीआई ने सीएमएम कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि क्वात्रोच्चि के खिलाफ कोई भी सबूत मौजूद नहीं हैं। लिहाजा उनके खिलाफ चल रहे मामले की सुनवाई बंद कर देनी चाहिए। अदालत ने अर्जी पर सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तारीख तय की है। जबकि तीस हजारी अदालत स्थित मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कावेरी बावेजा की अदालत में अधिवक्ता अजय अग्रवाल ने एक बार फिर से अर्जी देकर कहा है कि मामला बंद नहीं करना चाहिए।

--4 जनवरी, 2011: बोफोर्स दलाली मामले में इटली के व्यापारी ओतावियो क्वात्रोच्चि के खिलाफ मामला बंद करने के लिए दबाव बनाते हुए सीबीआई ने दिल्ली की एक अदालत में कहा कि इनकम टैक्स अपीली ट्रिब्युनल के आदेश में कुछ भी नया नहीं है। तीस हजारी कोर्ट के मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विनोद यादव की अदालत में सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने कहा कि मामले में केस बंद करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।

ये राजबब्बर जो आज कांग्रेसी बनकर








ये राजबब्बर जो आज कांग्रेसी बनकर गाँधी खानदान के तलवे चाट रहा है... एक जमाने में जब ये सपा में था तब इसी कांग्रेस को जी भरकर कोसा करता था ... कांग्रेस को नीच, भ्रष्ट, चमचो की जमात, भ्रष्टाचार की गंगोत्री कहा करता था .. आगरा में एक सभा में इसने कहा था की किसी भी कांग्रेसी का पैजामा खोलकर देख लीजिये.. आपको एक दूम जरुर दिखेगी जो कांग्रेसी होने का प्राकृतिक पहचान है क्योकि बिना दूम हिलाए कोई कांग्रेसी नही हो सकता |

फिर जब मुलायम ने इसे लातमारकर भगाया तो ये कुछ दिनों तक वीपी सिंह के साथ रहा .. और उस वक्त एक पत्रकार ने इससे सवाल पूछा था की वीपी सिंह की तबियत तो खराब रहती है फिर आप अपने भविष्य के लिए किस पार्टी में जायेंगे .. तो इस दोगले ने जबाब दिया था की मै कांग्रेस छोड़कर किसी अन्य पार्टी में जाना या फिर राजनीती से सन्यास लेकर वापस फ़िल्मी दुनिया में जाना पसंद करूंगा क्योकि मै सच्चा लोहियावादी हूँ और मैं अपने जीवन में यदि किसी के विचारो को आत्मसात किया है तो वो है लोकनायक जय प्रकाश नारायण ..जो अधिनायकवाद के खिलाफ थे और कांग्रेस में तो सिर्फ अधिनायकवाद है एक ही खानदान १०० सालो से इस पार्टी को चला रहा है और मेरे जैसा स्वाभिमानी इन्सान कभी कांग्रेस में शामिल होना तो दूर शामिल होने की सोच नही नही सकता |

और मित्रो, आज देखिये ... ये दोगला राजबब्बर उसी कांग्रेस का प्रवक्ता बना है जिस कांग्रेस को इसने पूरी जिन्दगी गाली दी ... और तो और खुद नीच नकली गांधियो को भी शर्म नही आई की जिस व्यक्ति ने पूरी जिन्दगी इन्हें गाली दिया ये उसी को थूककर चाट रहे है |




हरियाणा सरकार के द्वारा किसानो के मुंह पर

राहुल जी ... कभी कोकेन का नशा उतरे तो जरा अपनी प्यारी हरियाणा सरकार के द्वारा किसानो के मुंह पर मारे गये इस तमाचे को भी देख लेना ..

हलांकि पुरे देश को मालूम है की आप हरियाणा सरकार के इस कदम की तारीफ ही करेंगे क्योकि हुड्डा सरकार ने अपने नीच, लम्पट और भ्रष्ट बहनोई को हजारो एकड़ जमीन मुफ्त में दे दी है |

मित्रो, २००९ में बाढ़ से हरियाणा में किसानो की हजारो एकड़ फसल बर्बाद हो गयी ..पुरे पांच सालो में बाद कांग्रेस की सरकार ने किसानो को मुवावजा भी दिया तो सिर्फ एक रूपये, दो रूपये .. और सबसे ज्यादा मुवावजा छह रूपये का दिया गया है |

एक तरफ नीच कांग्रेसी अपने आपको किसानो का हितैषी कहते है ..गुजरात में किसान किसान कहकर हर रोज अपनी छाती कूटते है और दूसरी तरफ इनकी सरकारे खुलेआम किसानो के मुंह पर तमाचा मारती है |

मजे की बात ये की आज कुछ अख़बार वाले जब किसानो के पास चेक का फोटोकॉपी मांगे तो किसानो ने कहा की आप असली चेक ही ले लो ..क्योकि एक रूपये के चेक का फोटोकॉपी करने में भी एक रूपये लगेंगे |


Tuesday, July 23, 2013

शकील अहमद की छुठ पकड़ी गई


दोस्तोँ,,
कोँग्रेस परवक्ता शकील अहमद की छुठ पकड़ी गई. शकील अहमद ने कल कहा था NIA कि जाँच रिपोर्ट के अनुसार INDIAN MUZAHIDEEN का गठन 2002 दंग्गे के बाद हुआ था !
जबकी NIA का गठन 2009 मेँ हुआ और NIA ने कभी 2002 दंग्गे की जाँच नही की !
NIA की MEDIA Manager ने ऐसी किसी भी जाँच से इनकार कर दिया हैँ !
फिर तो सवाल ये हैँ कि ये बात शकील अहमद को कैसे मालुम ??
दोस्तो मैँ बता दुँ शकील अहमद बिहार के मधुबनी जिले से आते हैँ,,
और हाल ही मेँ INDIAN MUZAHIDEEN के कई आतंकवादी मधुबनी जिले से पकड़े गये थे,,
और अब सवाल ये हैँ कि शकील अहमद को ये बात कैसे पता इसकी जाँच होना अभी बाकी हैँ,,
और INDIAN MUZAHIDEEN मेँ शकील अहमद की क्या भुमिका हैँ??
मधुबनी जिले मेँ पकड़े गए आतंकवादियोँ मेँ शकिल अहमद की क्या भुमिका हैँ??
शकील अहमद के इलाके मेँ ये आतंकवादी क्योँ छिपे थे और क्या कर रहे थे ??
कितने दिनोँ से वहाँ रह रहे थे इतने सारे सवाल से घिर गए हैँ शकील अहमद !
इन सब से कोँग्रेस इतना डर गई कही हैँ कि जनता के सामने कोँग्रेस और आतंकवादियोँ के संबंध का सच सामने ना आ जाए इस बात से राहुल अपने सभी परवक्ताओँ से खफा हो कर अपने सभी परवक्ताओँ को जुबान संभाल कर बोलने कि हिदायत दे डाली!!!


http://timesofindia.indiatimes.com/india/Shakeel-Ahmeds-remark-Rahul-warns-party-men-Jaitley-says-Congress-painting-IM-as-riot-victim/articleshow/21245300.cms?

Wednesday, July 10, 2013

चुनाव से पहेले एक छोटा युद्ध करवा सकती है कोंग्रेस.



विदेश मंत्री सलमान खुर्दिश और रक्षामंत्री एके एंटनी ने चीन जाके के बैठक करके लोंटे है.
ये सब चुनाव के समय ही क्यों हो रहा है ?
२०१४ के चुनाव से पहेले एक छोटा युद्ध करवा सकती है कोंग्रेस.
ये कोंग्रेस है ! सत्ता के लिए देश को बरबाद कर देंगी.
अभीतक उत्तराखंड के विनाश की सच्चाई क्या है वे सामने नहीं आई ! क्यों ?
अगर समय रहेते जनता जागे गी नहीं तो फिर एक उत्तराखंड जेसा
विनाश निश्चित है.

Sunday, July 7, 2013

माओवादी नक्सली हमारे भाई है



माओवादी नक्सली हमारे भाई है ऐसा कह कर कांग्रेस ने सच्चाई सामने ला ही दी कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और छत्तीसगढ़ प्रभारी भक्त चरणदास का यह बयान राज्य से लेकर केंद्र तक नक्सल हमदर्दी का सूचक है एक तरफ कांग्रेस के महासचिव दिग्गी लश्कर आतंकी इशरत को बेटी कहते है वही दूसरी तरफ प्रभारी नक्सलियों को अपना भाई कहते है आतंकियों नक्सलियों के प्रति इनका प्यार पीड़ा अनायास ही उत्त्पन नहीं होती रही है ओसामा जी से लेकर दाउद जी सभी इनके लिए सम्मान के पात्र रहे है ऐसे में जिनके परिजन इस कलश यात्रा में सम्मिलित हुए है या हो रहे है उन्हें भी सोचना चाहिए की कही वे अनजाने में गलत लोगो जो की नक्सलियों के प्रति भाई जैसा प्यार रखते है उनके हाथ मजबूत तो नहीं कर रहे है ....

Saturday, July 6, 2013

ये सरकार पाकिस्तान को गैस देगी

"घर में नहीं खाने को अम्मा चली भुनाने को"
मित्रो ये कांग्रेसी सरकार इस देश को पूरा बर्बाद करके ही मानेगी।
अपने देश में वैसे ही गैस की कमी है और ये सरकार पाकिस्तान को गैस देगी।
कभी बिजली देती है कभी पैसे देती है। लेकिन अपने देश की जनता के लिए इसके पास एक धेला भी नहीं है।


कांग्रेसियों की धूर्तता की पराकाष्ठा

कांग्रेसियों की धूर्तता की पराकाष्ठा पर एक खबर ...............!!!

उतराखंड के कांग्रेसियों ने वोटरों में बांट दी राहत सामग्री......

उत्तराखंड में आई आपदा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जब 100 ट्रक राहत सामग्री दिल्ली से रवाना की तो इसके साथ ऐसा कोई आदेश चस्पा नहीं था कि यह राहत केवल उन्हें दी जाए जो पार्टी के वोटर हैं।

अब इसे रुद्रप्रयाग के कांग्रेसियों धूर्तता ही कहा जा सकत है कि उन्होंने राहत वहां बंटवा दी, जहां आपदा आई ही नहीं। उत्तराखण्ड के चमोली के थराली में भी इस तरह की शिकायतें मिली हैं की जहां एक तरफ हजारों लोग राहत को तरस रहे हैं और दूसरी तरफ प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस अपनों पर करम कर रही है। इसे लोकसभा चुनाव के मद्देनजर वोट बैंक को पक्का करने का जरिया समझें या कुछ और, लेकिन रुद्रप्रयाग में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को ऐसे दलित तबके के लोगों तक राहत सामग्री पहुंचा दी, जो आपदा प्रभावित हैं ही नहीं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में पार्टी के इस कदम के तमाम निहितार्थ निकाले जाने लगे हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने राहत सामग्री को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भेजने के बजाय मुख्यालय में बनाए गए गोदामों में बंद किया हुआ है।

माना जा रहा कि इसका इस्तेमाल भी वोट बैंक को सहेजने के लिए ही किया जाएगा। पूरी तरह तबाह हो चुकी केदारघाटी के गौरीगांव, त्रियुगीनारायण, गुप्तकाशी, फाटा, चंद्रापुरी, अगस्त्यमुनि, विजयनगर समेत कई क्षेत्रों में अभी तक राशन नहीं पहुंच पाया है। पीड़ित लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं। इस पूरे मामले में कांग्रस के जिला प्रवक्ता सत्येंद्र बत्र्वाल ने कोई जानकारी होने से इन्कार किया। उनका कहना है कि सड़क खुलने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री भेजी जाएगी।

Thursday, July 4, 2013

कांग्रेस सरकार किसी विदेशी को शरण देने में भी कितना दोगलापन

केंद्र की कांग्रेस सरकार किसी विदेशी को शरण देने में भी कितना दोगलापन और वोटबैंक का गुणाभाग लगाकर ही फैसला लेती है ...

तालिबान से डरकर अफगानिस्तान के चालीस नेताओ ने अपने परिवार के साथ भारत में शरण मांगी .. उनमें डा अब्दुला अब्दुला, नजीबुल्लाह के सात भाई और उनके परिवार के लोग ..अहमद शाह मसूद का पूरा परिवार, हिकमतयार का पूरा परिवार, आदि प्रमुख थे ...

भारत सरकार ने इन्हें न सिर्फ तुरंत शरण दिया बल्कि इनको लेने के लिए अपना विशेष विमान हेरात, और काबुल रवाना कर दिया था ...

मध्य पूर्व का सबसे बड़ा आतंकवादी यासिर अराफात को जब छींक भी आती थी तब वो भागकर इंदिरा गाँधी और बाद में राजीव गाँधी के पास आता था ..उसको सफर करने के लिए इंदिरा गाँधी ने उसे एक बोईंग विमान गिफ्ट में दिया था .. फिर बाद में राजीव गाँधी ने उसे इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार से नवाजा जिसमे उसको उस जमाने में १० करोड़ रूपये नगद दिए गये थे |

मजे की बात ये की फिलिस्तीन को सबसे पहले राष्ट्र की मंजूरी देने वाल देश न सउदी अरब था और न पाकिस्तान ..बल्कि भारत ने सबसे पहले फिलीस्तीन को राष्ट्र की मंजूरी दी .. और यासिर अराफात जब आतकंवादी था तब भी उसे भारत ने एक राष्ट्रप्रमुख का दर्जा दिया था ...

डा अब्दुला अब्दुल्ला की दोनों बेटियों को भारत सरकार ने विदेशी कोटे से एम्स में एमबीबीएस में दाखिला दिया था ... उनको जोरबाग में एक आलिशान सरकारी बंगला एलाट हुआ था ...

और देखिये ... जब स्नोडेन और तसलीमा भारत से शरण मांगते है तो भारत की नीच और दोगली सरकार उनको शरण देने से मना कर देती है |

और तो और भारत में ही पैदा हुए और भारत के मूल नागरिक सलमान रश्दी को भी भारत अपने यहाँ शरण नही देता ..

Wednesday, July 3, 2013

आपदा पर कोई राजनीति ना करे


फिर भी कांग्रेसी निर्लज्जता से कहते हैं कि आपदा पर कोई राजनीति ना करे.!!
लानत है इस कमीनेपन पर.!!

Tuesday, July 2, 2013

राष्ट्रपिता या ऐय्याश?

राष्ट्रपिता या ऐय्याश?

इण्डिया टूडे में यह लेख पढने के बाद मैंने
महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता अस्वीकार कर
दिया, और आपने ?
या तो इण्डिया टूडे को झून्ठा साबित

करो या करमचन्द्र गाँधी को राष्ट्रपिता की पदवी से हटाओ .....
यह है वो लेख ....
१५ साल की उम्र में गाँधी जी वेश्या की चोखट
से हिम्मत न जुटा पाने के कारण वापस लौट
आये .१६ साल की उम्र में पत्नी से सम्भोग
की इच्छा से मुक्त नहीं हो पाए जब उनके पिता मृत्यु शैया पर थे .२१ साल की उम्र में
फिर उनका मन पराई स्त्री को देखकर
विकारग्रस्त होता है .२८ साल की उम्र में
हब्सी स्त्री के पास जाते है लेकिन शर्मसार
होकर वापिस आ जाते है .३१ साल की उम्र में
१ बच्चे के पिता बन जाते है .४० साल की उम्र में अपने दोस्त हेनरी पोलक की पत्नी के साथ
आत्मीयता महसूस करते है ,४१ साल की उम्र में
मोड नाम की लड़की से प्रभवित होते है .४८
की उम्र में २२ साल की एस्थर फेरिंग के
मोहजाल में फंस जाते है .५१ की उम्र में ४८ साल
की सरला देवी चोधरानी के प्रेम में पड़तेहै .५६ की उम्र में ३३ साल की मेडलिन स्लेड के प्रेम
में फंसते है .६० की उम्र में १८ साल
की महाराष्ट्रियन प्रेमा के माया जाल में फंस
जाते है .६४ की उम्र में २४ साल
की अमेरिकाकी नीला नागिनी के संपर्क में
आते है .६५ की उम्र में ३५ साल की जर्मन महिला मार्गरेट स्पीगल को कपडे
पहननासिखाते है .६९ की उम्र में १८ साल
की डॉक्टर शुशीला नैयर से नग्न होकर
मालिश करते है.७२ की उम्र में बाल
विधवा लीलावती आसर,पटियाला के बड़े
जमींदार की बेटी अम्तुस्स्लाम ,कपूरथला खानदान
की राजकुमारी अमृत कौर तथा मशहूर
समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण
की पत्नी प्रभावती जैसी महिलाओ के
साथसोते है .७६ की उम्र में १६ साल
की आभा .वीणा और कंचन नाम की युवतिओं को नग्न होने को कहते है . जिस पर ये
लडकिया कहती है की उन्हें ब्रह्मचर्य
केबजाय सम्भोग की जरूरत है .७७ की उम्र मे
महात्मा गाँधी अपनी पोती मनु की साथ
नोआखाली की सर्द रातें शरीर को गर्म रखने
के लिए नग्न सोकर गुजारते है . और७९ के गाँधी जी महात्मा जीवन के अंतिम
क्षणों तक आभा और मनु के साथ एक साथ
बिस्तर पर सोते है………………….आपको इनके
बारे मे क्या कहना है?

लिंक:= http://indiatoday.intoday.in/story/mahatma-gandhi-experiment-sexuality-manuben-discovered-diarie
s/1/278952.html

Saturday, June 29, 2013

मनहूसियत की दुकान

ये मनहूसियत की दुकान दुनिया में जहाँ कहीं भी जाएगी जाकर बस समस्या ही पैदा करेगी..








उतराखंड की तबाही - एक कांग्रेसी षड़यंत्र



आप सभी जानते है केदारनाथ धाम से ऊपर जो पहाड़ियाँ है वो पथरीली है चाहे कितने भी बादल फटे वो टूटती नही है.केदार नाथ की उपरी पहाड़ियों को विस्फोट से तोडा गया है,सैटेलाईट से ये बात तो साफ़ कर चूका है मौसम विभाग कि वहा को भी बादल नही फाटा है।

Thursday, June 27, 2013

राहुल के लिए खाली कराया जवानों का कैंप

शर्मनाक: राहुल के लिए खाली कराया जवानों का कैंप
Updated on: Thu, 27 Jun 2013 08:19 PM (IST)




शर्मनाक: राहुल के लिए खाली कराया जवानों का कैंप





नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बाढ़ से तबाह उत्तराखंड का दौरा शुरू से ही विवादों में रहा है। इस क्रम में एक और खुलासा करते हुए आईटीबीपी के डीजी अजय चढ्डा ने गुरुवार को खुलासा किया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के दौरान राहुल के रुकने के लिए राहत कार्य में लगे जवानों के कैंप को खाली कराया गया था।


आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहुल गांधी सहित कांग्रेस के प्रमुख नेता को जाने की अनुमति देना तथा दूसरी तरफ भाजपा नेता नरेंद्र मोदी को यह कह कर वहां जाने से रोक देना कि इससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित होगा शुरू से ही विवादों में है।

इसी बीच खबर आ रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को राहत सामग्री से भरे जिन एक सौ ट्रकों को उत्तराखंड के लिए भेजा गया था उन सब का डीजल खत्म हो गया है। वे सब पिछले दो-तीन दिनों से रास्ते में हैं। ट्रकों के ड्राइवरों के पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही उन्हें साधन मुहैया नहीं कराया गया तो वे राहत सामग्री बेचने को मजूबर हो जाएंगे।

इससे पहले बुधवार को भी आपदा राहत और बचाव कार्य का श्रेय लेने के चक्कर में कांग्रेस और टीडीपी के नेताओं ने आपस में गाली-गलौच तथा मारपीट की। जौलीग्रांट हवाई अड्डे के बाहर उस वक्त माहौल बिगड़ गया जब कांग्रेस व तेलुगु देसम पार्टी के नेताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। शाम करीब साढे़ पांच बजे आंध्र के कुछ तीर्थयात्री एक वाहन में सवार हुए।

वाहन में जगह न होने के कारण कुछ बाहर रह गए। बाहर रह गए तीर्थयात्रियों ने यह कहते हुए हंगामा काटना शुरू कर दिया कि तेलुगु देसम पार्टी के नेताजी अपने ही लोगों को वाहन में बैठा रहे हैं। इसी दौरान तेलुगु देसम पार्टी के नेता रमेश राव और कांग्रेस नेता हनुमंत राव के बीच झड़प और धक्का-मुक्की हुई। नेताओं को भिड़ता देखकर दोनों पार्टियों के लोगों के बीच भी धक्का-मुक्की होने लगी। इससे वहां पर जाम लग गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह दोनों पक्षों को शांत कराया।

Tuesday, June 25, 2013

राहत का सामान उतरवा खुद उड़ गए हरक सिंह

शर्मनाक: राहत का सामान उतरवा खुद उड़ गए हरक सिंह

Updated on: Tue, 25 Jun 2013 03:06 AM (IST)
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शर्मनाक: राहत का सामान उतरवा खुद उड़ गए हरक सिंह
देहरादून, [सुमन सेमवाल]। नेताजी ये क्या, केदारघाटी में कुदरत के कहर से कराह रहे लोगों के लिए जा रही राहत सामग्री उतरवाकर खुद हेलीकॉप्टर से सैर पर निकल पड़े। जनाब यह भी भूल गए कि इस वक्त पीड़ितों को उनकी हवाई नेतागीरी से ज्यादा राहत की जरूरत है। सोमवार को उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने ऐसी ही नेतागीरी का नमूना पेश किया। उनसे पहले एक कैबिनेट मंत्री और विधायक भी ऐसा कर चुके हैं।
राहत उपायों में लापरवाही को लेकर बदनामी झेल रही उत्तराखंड सरकार के माथे पर सरकार के एक और मंत्री ने काला टीका लगाया है। सोमवार को केदारघाटी में फंसे लोगों के लिए राहत सामग्री ले जाने के लिए मौसम में सुधार का इंतजार किया जा रहा था। सुबह से राहत सामग्री लेकर सहस्त्रधारा हेलीपैड पर तैयार खड़े हेलीकॉप्टर को शाम करीब पौने चार बजे उड़ाने की हल्की सी संभावना नजर आई। पायलट ने पीड़ित लोगों की जरूरत देखकर खतरा उठाने का जज्बा दिखाया। लेकिन तभी वहां पहुंचे मंत्री हरक सिंह की नेतागीरी चमकाने की उत्कंठा जाग उठी। उन्होंने आव न देखा ताव। उन्होंने आपदा राहत का पूरा सामान नीचे उतरवाया और हेलीकॉप्टर में खुद सवार होकर निकल पड़े। इसकी वजह से देहरादून से केदारघाटी में राहत जा ही नहीं पाई। रावत के साथ विधायक सुबोध उनियाल भी गए हैं। इसका पता तब चला जब शाम को पानी बरसने लगा और दोनों नेता केदारनाथ में ही फंस गए। रात में दोनों के वहीं पर रहने की सूचना है।
काबिलगौर है कि जनप्रतिनिधियों का इस तरह का रवैया पहले भी सामने आ चुका है। एक रोज पहले प्रदेश के परिवहन मंत्री सुरेंद्र राकेश अपने निजी सहायक के साथ हेलीकॉप्टर में चल पड़े थे। इसके एक दिन पहले केदारनाथ की विधायक शैलारानी रावत ने देहरादून से केदारनाथ के लिए उड़ान भरी, लेकिन रास्ते में उन्हें याद आया कि उनका बैग हेलीपैड पर छूट गया है। विधायक ने इस बैग को लाने के लिए हेलीकॉप्टर आधे रास्ते से वापस देहरादून के लिए मोड़ा गया। ऐसे मौके पर जबकि आपदा पीड़ित पल-पल मौत से लड़ रहे हैं, नेताओं का इस तरह का रवैया सवाल खडे़ कर रहा है।
पीड़ितों के परिजनों से मिले बिना निकल गए अजीत पवार
प्रियंका देशपांडे (मिड डे), मुंबई। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड जाना और गुजरात के तीर्थयात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराने की चर्चा हर राजनीतिक मंच पर हुई। उत्तराखंड में बाढ़ में विभिन्न जगहों पर फंसे महाराष्ट्र के तीर्थयात्रियों को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाने के मुद्दे पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार एक नए विवाद में फंस गए हैं। छह घंटे से उनसे मिलने का इंतजार कर रहे उत्तराखंड में फंसे लोगों के परिजनों से वह मिले बिना चले गए।
पवार उनकी शिकायत सुनने के बजाय उनकी ओर देखे बिना जब सरकारी भवन से निकल गए तो 27 लापता तीर्थयात्रियों के परिजनों ने वहां राकांपा के कार्यकताओं का घेराव कर दिया। हंगामा होने के बाद अजीत पवार उनसे पांच मिनट मिलने को तैयार हुए लेकिन वहां नहीं बल्कि वहां से पांच किलोमीटर दूर किसी दूसरी जगह पर। वैसे महाराष्ट्र सरकार ने उत्तराखंड के पीड़ितों के लिए दस करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की है।

क्या कांग्रेस की सरकार --उत्तराखंड में भी वैसा ही करेगी



एतराज इस बात पर कि ..सरकार ने जनता से जो रुपया "दान" या "सहायता" के रूप में, किसी ख़ास "आपदा" के लिए लिया ... वो धनराशी --उस ही कार्य में खर्च क्यों नहीं होती है। 

बस ये ही एक "मासूम सा' -भोला सा -- सवाल है .... क्या कांग्रेस की सरकार --उत्तराखंड में भी वैसा ही करेगी ..जैसा की दिग्विजय नाम के .... दोग्विजय ने किया था --जब वो MP का मुख्यमंत्री था।

Monday, June 24, 2013

सब आदेश-निर्देश अचानक कैसे बदल दिए गए.?

गाँव उजड़ लिया, मेला बिछड़ लिया...
वोटों के बड़े वाले भिखारी अब पहुंचे हैं.!!

विदेश में जन्मदिन मनाकर एक सप्ताह बाद लौटे पप्पू से ज्यादा लाशों पर राजनीति करने वाला कौन होगा.?? कल तक उत्तराखंड सरकार राहत सामग्री लेना बंद कर नगदी मांग रही थी, पप्पू के आते ही सब आदेश-निर्देश अचानक कैसे बदल दिए गए.?

जनता भले ही भूल जाती हो, मगर मुझे याद है पिछली साल यूपी में पप्पू ने खुद को ब्राह्मण बताया था... लगता है उसी 'ब्राह्मण'.?? को विजय बहुगुणा ने कर्मकांड के लिए बुलाया है.!!

यूँ ही चलता रहा तो एक दिन पप्पू कांग्रेस का अंतिम संस्कार करवाकर ही मानेगा.!!

2014 में हर देशभक्त को कांग्रेस के कर्मकांड का इन्तजार है.!!

गाँव उजड़ लिया, मेला बिछड़ लिया...
वोटों के बड़े वाले भिखारी अब पहुंचे हैं.!!

विदेश में जन्मदिन मनाकर एक सप्ताह बाद लौटे पप्पू से ज्यादा लाशों पर राजनीति करने वाला कौन होगा.?? कल तक उत्तराखंड सरकार राहत सामग्री लेना बंद कर नगदी मांग रही थी, पप्पू के आते ही सब आदेश-निर्देश अचानक कैसे बदल दिए गए.?

जनता भले ही भूल जाती हो, मगर मुझे याद है पिछली साल यूपी में पप्पू ने खुद को ब्राह्मण बताया था... लगता है उसी 'ब्राह्मण'.?? को विजय बहुगुणा ने कर्मकांड के लिए बुलाया है.!!
#pappureturns

यूँ ही चलता रहा तो एक दिन पप्पू कांग्रेस का अंतिम संस्कार करवाकर ही मानेगा.!!

2014 में हर देशभक्त को कांग्रेस के कर्मकांड का इन्तजार है.!!

Sunday, June 23, 2013

इनकी नियत सेवाभाव की नहीं है

अब पता चला की मोदी ने इन भ्रस्तो को सिर्फ दो करोड़ ही क्यों दिए ?? क्योकि इनकी नियत सेवाभाव की नहीं है ..

जाने दिग्विजय सिंह जी के बारे में

आज जिसको देखो वो परमपूज्य श्री दिग्विजय जी पर व्यंग कसता फिरता हैं | इन मूर्खो को परम प्रतापी दिग्गी राजा जी की बहुमुखी प्रतिभा का ज्ञान नहीं इसलिए | आइये जाने दिग्विजय सिंह जी के बारे में

# जब इनका जन्म हुआ तो इंसानों के अलावे शहर भर के आवारा कुत्तो में बेशुमार जश्न का माहौल था |
# इनके जन्म पर विश्व भर के किन्नरों ने बधाई दी थी |
# बहुमुखी प्रतिभावान दिग्विजय जी में इंसानों के अलावे कुत्ते, सूअर व चिम्पैंजियों के भी DNA मौजूद हैं |
# विश्व भर में सिर्फ दो ही चीज़े बड़ी लम्बी हैं , कानून के हाथ व दिग्विजय जी की जुबान |
# दिग्विजय जी बिना रुके नॉन स्टॉप 24 घंटे अपनी जुबान चला सकते हैं |
# ये अपनी जुबान से प्रति मिनट 10 मेगावाट बिजली पैदा कर सकते हैं |
# आरएसएस जिसे कोई नहीं जानता था उसे दिग्विजय जी ने पहचान दिलाई |
# अपने बातो में आरएसएस का जिक्र करके उन्होंने लोगो में संघ के प्रति जागरूकता पैदा की |
# इन्ही की बदौलत बड़ी संख्या में लोग आरएसएस से जुड़े |
# इनका जन्म का मुख्या उद्देश्य कांग्रेस का सफाया हैं और ये कई राज्यों में इसका प्रमाण भी दे चुके हैं |
# जन जन तक मोदी का प्रचार दिग्विजय जी ने अपने भाषणों से किया |
# इनकी बाते इंसानों की समझ से परे हैं क्यूंकि इनका दिमाग हाई-टेक क्वालिटी का हैं |
# आज राहुल गाँधी की जो भी छवि हैं वो इन्ही की बदौलत हैं |
# इनके दिमाग की कीमत विश्व में सबसे ज्यादा रखी गयी हैं क्यूंकि उसका आज तक इस्तेमाल नहीं किया गया |
# बिखरती भाजपा को बीच बीच में टोनिक देने का काम दिग्विजय जी ने किया |
# एमपी की जनता को एक अच्छा मुख्यमंत्री सिर्फ दिग्विजय जी के कारण हुआ , आज इन्ही के महान कार्यो की बदौलत एमपी में कांग्रेस को कोई नहीं चुनता |
# राहुल बाबा ने मोहनदास गाँधी के अधूरे सपने (कांग्रेस का खात्मा ) को पूरा करने का बीड़ा उठाया हैं और उन्हें इस जिम्मेदारी का एहसास दिग्विजय सिंह जी ने दिलवाया |
# आज फेसबुक पर लगभग सभी राजनैतिक हास्य व व्यंग पर आधारित पेज इन्ही की बदौलत चलते हैं |
# जो लोग कभी नहीं हँसते थे उनके चहरे पर दिग्विजय सिंह ने अपनी बेबाक बातो से हंसी लायी |
# चुतिया , बकलोल , पागल जैसे शब्दों को उदाहरण की जरुरत थी , आज इन शब्दों का प्रयोग दिग्विजय सिंह के लिए होता |
# दिग्विजय सिंह जी के घर हर अमावश्य को अखंड चुतियापा का पाठ होता हैं |
# जहाँ लोग एक पिता नहीं एफोर्ड कर पाते इन्होने कई पिताओं को अपने जीवन में जगह दी |
# बुरे लोगो से भी अच्छे तरीके से बात करना दिग्विजय सिंह जी ने सिखलाया ( ओसामा जी ) |

अंग्रेजो की कूटनीति और भारत का विभाजन

अंग्रेजो की कूटनीति और भारत का विभाजन :-----

भारत के साथ सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि इसका इतिहास जो आज विद्यालयों में पढ़ाया जा रहा है वह इसका वास्तविक इतिहास नही है। यह इतिहास विदेशियों के द्वारा हम पर लादा गया एक जबर्दस्ती का सौदा है और उन विदेशी लेखकों व शासकों के द्वारा लिखा अथवा लिखवाया गया है जो बलात हम पर शासन करते रहे और शताब्दियों तक इस राष्ट्र का शोषण करते रहे।भारत के अतीत को खोजिये तो आप पाएंगे कि आज का बांग्लादेश, पाकिस्तान, बर्मा, नेपाल, तिब्बत, भूटान, श्रीलंका, मालद्वीप, ईरान और अफगानिस्तान सहित एशिया में कितने ही देश, इस देश के अतीत के अंग बने हुए थे। ये सब मिलकर भारत का निर्माण करते थे अथवा यह कहें कि इन सबसे मिलकर भारत बनता था। कभी मगध के अधीन तिब्बत और नेपाल भी रहे थे। त्रिविष्टप तो तिब्बत का प्राचीन नाम है जहां से उतरकर आर्य लोग शेष भारत में फैले थे। यह प्रदेश ही प्राचीन काल में मानव सृष्टि का उदगम स्थल माना गया है। ईरान कभी आर्यन प्रदेश था तो अफगानिस्तान उपगण-स्थान के नाम से जाना जाता था।

ईरान के राजा तो अपने नाम के साथ सदा आर्य मेहर (सूर्यवंशी आर्य) शब्द का प्रयोग करते रहे हैं। वहां की हवाई उड़ानों का नाम आर्यन ही है। वहां आज तक हमें यही पढ़ाया जाता है कि आर्य लोग भारत से यहां आये। जबकि भारत में इसका विपरीत पढ़ाया जाता है। इस उल्टे को यहां सीधा नही किया जा सकता। क्योंकि कुछ लोगों की आपत्ति होती है कि ऐसा करने से भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को खतरा उत्पन्न हो जाएगा। यह प्राचीन भारत अपने स्वरूप में सन 1876 ई तक लगभग ज्यों का त्यों बना रहा। उस समय तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान, श्री लंका, बर्मा, नेपाल, तिब्बत, भूटान, बांग्लादेश इत्यादि देशों का कोई अस्तित्व नही था। ये सारा भूभाग भारत कहा जाता था। अंग्रेजों ने 26 मई सन 1876 ई को रूस की साम्राज्यवादी नीति से बचने के लिए भारत को प्रथम बार विभाजित किया और अफगानिस्तान नाम के एक बफर स्टेट की स्थापना कर उसे स्वतंत्र देश की मान्यता दी। तब भारत के देशी नरेश इतने दुर्बल और राष्ट्र भक्ति से हीन हो चुके थे कि उन्होंने इस विभाजन को विभाजन ही नही माना बल्कि बड़े सहज भाव से इस पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी।

इतिहास में इस घटना को विभाजन के रूप में दर्शित नही किया गया। आज तक हम वही पढ़ रहे हैं जो अंग्रेजों ने इस विषय में लिख दिया था। इसके पश्चात सन 1904 ई में नेपाल को तथा सन 1906 ई में भूटान और सिक्किम को भारत से अलग किया गया। बाद में सिक्किम ने सन 1976 ई में भारत में अपना विलय कर लिया, जबकि नेपाल के विलय प्रस्ताव को रूस के समर्थन के बाद भी नेहरू जी ने सन 1955 ई में अस्वीकार कर दिया। अंग्रेज शासक अपने साम्राज्य की सुरक्षार्थ निहित स्वार्थों में देश को बांटता गया और नये नये देश इसके मानचित्र में स्थापित करता गया और हमने कुछ नही किया। सन 1914 ई में अंग्रेजों व चीन के मध्य एक समझौता हुआ जिसके अनुसार तिब्बत को एक बफर स्टेट की मान्यता दी गयी। मैकमोहन रेखा खींचकर हिमालय को विभाजित करने का अतार्किक प्रयास किया गया, जो भूगोल के नियमों के विरूद्घ था।

सन 1911 ई में अंग्रेजों ने श्रीलंका और सन 1935 ई में बर्मा को अलग देश की मान्यता दे दी। अंग्रेज शासक राष्ट्र की एकता और अखण्डता को निर्ममता से रौंदता रहा और हम असहाय होकर उसे देखते रहे। इनसे दर्दनाक और मर्मान्तक स्थिति और क्या हो सकती है? कांग्रेस इस सारे घटनाक्रम से आंखें मूंदे रही। उसकी उदासीनता सचमुच लज्जाजनक है। बर्मा, रंगून और माण्डले की जेलें हमारे देशभक्तों को सजा देने के काम आती रहीं। कोई वह विदेश की जेलें नही थी, अपितु वह अपने ही देश की जेलें थी, जहां अंग्रेज हमारे देशभक्तों को ले जाया करते थे। उन पर तत्कालीन कांग्रेसी नेतृत्व ने जरा भी विचार नही किया। ऐसा लगता है कि यथाशीघ्र सत्ता मिल जाना और इस देश पर शासन करना ही कांग्रेसी नेताओं की परंपरा थी। इसलिए जब अंग्रेज यहां से गया तो उसने मालदीव को भी अलग देश का स्तर दे दिया और इस देश के तीन टुकड़े कर गया। पिछली सदी की भयानक त्रासदी थी-भारत विभाजन जिसमें लाखों लोग जनसंख्या की अदला बदली में मारे गये थे।

आज देश में अराजकता की स्थिति है। भगीरथ को अपने साठ हजार पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गंगा को हिमालय से धरती पर लाना पड़ा था, लेकिन हम अपनी आजादी के समय लगभग दस लाख लोगों के मरने को शहादत तो दूर उसे मरना भी नही मानते। हमने उनकी आत्मा की शांति के लिए कुछ भी तो नही किया। उनकी याद को यूं भुला दिया गया जैसे कुछ हुआ ही नही, यानि ये वो लोग रहे जिनके लिए न तो दीप जले और न पुष्प चढ़े। कांग्रेसी नेतृत्व ने इस ओर भी ध्यान नही दिया कि भारत में मुस्लिमों की जनसंख्या में हो रहे अचानक जनसांख्यिकीय परिवर्तन के क्या परिणाम होंगे? इसलिए उसने पूर्व के विभाजनों की भांति इस विभाजन को भी सहज रूप में मान लिया। एक षडयंत्र के अंतर्गत हम आज तक वही पढ़ते आ रहे हैं जो अंग्रेजों ने हमारे विषय में लिख दिया है। यह केवल भारत ही है जहां अपने गौरवपूर्ण अतीत की बातें करना भी साम्प्रदायिकता माना जाता है।

लगता है कि हमने अपने अतीत के कडवे अनुभवों से कोई शिक्षा नही ली है। पाकिस्तान का अस्तित्व भारत का सातवां और बांग्लादेश आठवां टुकड़ा है। क्या अनुसंधान कर्ता इस ओर ध्यान देंगे?

Friday, June 21, 2013

आखिर हमारा टैक्स किस काम का ?

जुलाई अगस्त 2010 पकिस्तान में बाढ़ आई थी हमारे मनमोहन सिंह जी ने पकिस्तान को अपनी तरफ से मदद की पेशकश की थी | अपनी तनख्वाह के नहीं हमारी मेहनत के . मंदिरों के , टैक्स के पैसा 5 मिलयन डॉलर पकिस्तान को देदिए | उसके बाद 20 मिलियन डॉलर की और पेशकश की |

अगर हज करने गए हाजीओं के साथ कोई दुर्घटना हुई होती, तो ये सरकार और कुत्ते कांग्रेसी और सेकुलरवादी कुत्ते अरबों खरबों की सहायता दे चुके होते, और पचास लाख प्रति मृतक को मुआवजा घोषित कर दिया होता, अब क्यूंकि उत्तराखंड में सिर्फ हिन्दू-सिख मरे हैं इस लिए सरकार मस्त और त्रस्त है … 

मई 2013 अफगानिस्तान में प्रणब मुखर्जी ने 2 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त सहायता राशि की घोषणा की सिर्फ अफगानिस्तान की सडको , बिजली और मेडिकल के लिए..

ये सिर्फ कुछ उदाहरण हैं बांग्लादेश, ईरान और न जाने कितने छोटे बड़े देश गिनती में हैं | और वही सरकार जो पकिस्तान , यूरो जोन , अफगानिस्तान , ईराक , बंगाल को पैसे बाँट रही है अपने देश में आई आपदा पे भिखारी हो जाती है |

हमारे मनमोहन जी जो विदेशों में मिलियन डालर बाँट रहे देश में सिर्फ 1000 करोड़ , मृतको को २ लाख रुपये जैसी बात कर रहें है..

1000 करोड़ का दान तो भारत के लोगरोज भिकारियो को दे दिया करते हैं|
जहाँ 20000 से अधिक लोग मारे गए हैं और २ लाख लोगों तक कोई सहायता पहुँच ही नहीं पायी है वहां हमारे देश में सिर्फ 145 करोड़ रुपये ही तत्काल जारी किये गए हैं |

आखिर हमारा टैक्स किस काम का ?

क्या कांग्रेसी इतने निर्दयी और निष्ठुर हो सकते है ??

क्या कांग्रेसी इतने निर्दयी और निष्ठुर हो सकते है ??

एक तरफ जहाँ पूरा देश उत्तराखंड की तबाही पर शोकमग्न है वही दूसरी तरफ शीला दीछित राहुल गाँधी के जन्मदिन को मनाने के लिए एक बड़ी पार्टी रखी थी ... 
आखिर अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्यों खामोश है ?? सिर्फ इन्डियन एक्प्रेस ने ही शीला के इस दोगलेपन को उजागर किया 
http://www.indianexpress.com/picture-gallery/today-in-pics-congress-workers-celebrate-rahul-gandhis-43rd-birthday/2926-3.html

"माना की देश में अँधेरा घना है ..
लेकिन किसी कांग्रेसी को जुतियाना कहा मना है "




Thursday, June 20, 2013

दोगली कांग्रेस



एक तरफ दोगली कांग्रेस की केंद्र सरकार उत्तराखंड के पीडितो के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष बनाकर भीख मांग रही है .. हर चैनेल पर कहा जा रहा है की कृपया उत्तराखंड बाढ़ पीड़ित राहत कोष में दान दे ....

दूसरी तरफ बैशाखी चोर विदेशमंत्री सलमान खुर्शीद ईराक में जाकर इराक को दो करोड़ डालर देने, २०० बसे, पचास रेल इंजन, दो हास्पिटल खोलने का एलान करता है ..

अरे दोगलो ... भारत के लोगो के लिए तुम राहत के लिए हमसे भीख मांग रहे हो और ईराक के जाकर खजाना खोल रहे हो ? क्या ये तुम्हारे बाप का पैसा है ??